बोतलबंद पानी संभवतः पिछली सदी की सबसे बड़ी मार्केटिंग चालों में से एक है। विज्ञापन हमें बताते हैं कि उनका पानी स्वास्थ्यवर्धक है, स्वाद में बेहतर है, और संदिग्ध लाभों की तुलना में अन्य चीजें काफी अधिक हैं। विज्ञापन के कारण हम नहीं जान पाते कि हमें झरने का पानी, मिनिरल वॉटर खरीदना है या सादा बोतलबंद पीने का पानी।

चालबाजी कैसे काम करता है?

नल के पानी और बोतलबंद पानी का बाजार महत्‍वपूर्ण आर्थिक हितों के साथ व्‍यापक वैश्विक लॉबियों में मुकाबला करेगा। यह प्राय: नागरिकों के लिए गलत सूचना के रूप में समाप्‍त होता है, जो अब यह नहीं जानते कि क्‍या सच है और क्‍या झूठ है। इसके अतिरिक्‍त, हमें पर्यावरणीय प्रभाव पर भी विचार करना होगा।

यह एक विरोधाभास है कि बोतलबंद पानी के सबसे बड़े उपभोक्ता वे देश हैं जिनके पास गुणवत्ता पूर्ण पीने के पानी तक पहुंच है। ये उपभोक्ता नल के पानी पर भरोसा नहीं करते हैं, हालांकि इसका कोई औचित्य नहीं है।

कुछ क्षेत्रों में नल के पानी का स्वाद एक कारण हो सकता है। लेकिन अगर हम बोतलबंद पानी की उच्च आर्थिक और पर्यावरणीय लागत को ध्यान में रखें तो यह तर्क स्‍वीकार करने योग्‍य नहीं है। इसके अलावा, कुछ ब्‍लाइंड टेस्टिंग अध्ययनों से पता चला है कि ज्यादातर मामलों में, हम नल के पानी और बोतलबंद पानी के स्वाद के बीच अंतर नहीं बता सकते हैं

कभी-कभी कुछ क्षेत्रों में नल के पानी का “खराब” स्वाद जमीन के भूविज्ञान के कारण होता है। पानी उपचारित होने से पहले विभिन्न परतों जैसे कि जिप्सीफेरस और लवणीय मिट्टी के साथ ही कठोरता या क्लोरीनीकरण से होकर गुजरता है। इस स्वाद को कभी भी स्वास्थ्य के लिए खतरा के साथ नहीं जोड़ना चाहिए। पीने का पानी मजबूत नियमों और नियंत्रणों के अधीन है। यह कभी भी यूरोपीय संघ या विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) जैसे विश्व संगठनों द्वारा स्थापित सुरक्षा स्तरों से अधिक नहीं होता है। पीने का पानी सबसे नियंत्रित खाद्य उत्पादों में से एकहै।

प्रदूषण और प्‍लास्टिक

अगर स्वाद नल के पानी का सबसे बड़ा दुश्मन है, तो प्रदूषण बोतलबंद पानी का सबसे बड़ा दुश्मन है। हमें दुनिया भर में उत्पन्न होने वाली प्लास्टिक की मात्रा की जानकारी नहीं है। इसमें एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा बोतलबंद पानी का है। हम सोच सकते हैं कि प्लास्टिक को रिसाइकल करना पर्याप्त है, लेकिन प्लास्टिक को अनिश्चित काल तक (कांच या एल्यूमीनियम के विपरीत) रिसाइकल नहीं किया जा सकता है। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि रीसाइक्लिंग में ऊर्जा की खपत होती है और गंदगी फैलती है। इस कारण से, आदर्श परिदृश्‍य यह है कि प्‍लास्टिक के उपयोग को घटाकर कर एकदम कम कर दिया जाए।

बोतलबंद पानी के सबसे बड़े उपभोक्ता अच्छे भाग्य वाले वे देश हैं जिनके पास गुणवत्ता पूर्ण पीने के पानी तक पहुंच है।

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प्लास्टिक निर्माण का भारी प्रदूषण

प्लास्टिक की बोतल के निर्माण में न केवल पेट्रोलियम (कच्चे माल और ऊर्जा के रूप में) के साथ-साथ अन्य जीवाश्म ईंधन की खपत होती है, बल्कि इसमें पानी (.26 से .52 गैलन प्रति कंटेनर) की भी खपत होती है। अंत में, हमें परिवहन और वितरण के लिए खपत होने वाले संसाधनों का भी ध्यान रखना चाहिए।

दूसरी तरफ, हम नल जल वितरण नेटवर्क की विशाल परिवहन क्षमता को महत्व नहीं देते हैं, जो न्यूनतम ऊर्जा खपत पर टनों पानी पहुंचाता है।

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नल का पानी

बोतलबंद पानी की कीमत एक और नकारात्मक पहलू है। हालांकि, कई उपभोक्ताओं को नल के पानी की तुलना में बोतलबंद पानी के लिए अधिक भुगतान करने में परहेज नहीं होता है। बोतलबंद पानी की कीमत कम लग सकती है, लेकिन औसत परिवार के लिए यह एक साल में कई सौ डॉलर तक पहुंच सकता है। दिलचस्‍प बात है कि कर से पूर्व एक लीटर गैसोलीन 0.26 गैलन के कुछ बोतलबंद पानी की तुलना में सस्‍ती होती है।

करों की बात करें, तो सवाल यह है कि बोतलबंद पानी (और सामान्य तौर पर सभी प्लास्टिक पैकेजिंग पर) पर प्रसिद्ध कार्बन टैक्स लगाया जाना चाहिए। कई देश पहले से ही अन्य उपभोक्ता वस्तुओं पर इस कर को लागू कर रहे हैं।

अंत में, क्‍या नल का पानी और बोतलबंद पानी हमारी दुनिया के बड़े प्रतिद्वंद्वियों में से एक हो सकते हैं, जैसे- मैक और पीसी? माराडोना और पेले? केचप और मेयो? दुर्भाग्यवश, एक अच्छा मार्केटिंग कैंपेन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक की तुलना में अधिक विश्वसनीय हो सकता है।