पिछली सदी में, हमें यह चिंता थी कि अक्षय ऊर्जा का एक नया रूप खोजने से पहले ही जीवाश्म ईंधन समाप्त हो जाएंगे। मौजूदा सदी में, मुख्य चिंता का विषय जलवायु परिवर्तन से संबंधित पर्यावरणीय प्रभाव है, जैसे पानी की कमी।

इस ग्रह पर लगभग दस लोगों में से एक-लगभग 800 मिलियन लागों-के पास सुरक्षित जल स्रोतों तक पहुंच नहीं है। जनसंख्‍या में बढ़ोत्तरी और जलवायु परिवर्तन के परिणाम टाइम बम की तरह हैं। यह पानी के उपयोग और प्रबंधन के इर्द-गिर्द अधिक से अधिक संघर्ष उत्पन्न करेगा।

विश्व आर्थिक मंच और अन्य संस्थानों का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक मांग 40% अधिक होगी। दुर्भाग्यवश, ग्रह इसकी आपूर्ति नहीं कर पाएगी। यह कृषि को प्रभावित करेगा जिसके कारण अनाज की कीमत में बढ़ोतरी होगी

पानी की कमी वाले विश्‍व के देश

इस तरह की समस्‍याओं के कारण बड़ी समस्‍याएं पैदा होंगी, जैसे कि वैश्विक जल संकट। संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्‍य (एसडीजी) (2015-2030) में सहमत हुई प्रतिबद्धताओं में पानी की समस्याओं को बहुत महत्त्व दिया गया है। इसके अलावा, वर्तमान कोविड-19 महामारी (2020) ने संक्रमण को रोकने के लिए पानी के महत्व को दर्शाया है।

2030 में पानी की 40% अधिक मांग होगी और ग्रह इसकी आपूर्ति नहीं कर पाएगा

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यह समस्या कहां से आती है?

पृथ्वी की सतह के पानी का लगभग 1% ही पीने के लिए उपयुक्त है। हालांकि यह राशि छोटी लगती है लेकिन यह पूरी दुनिया की आबादी के लिए पर्याप्त है।

हालांकि, वास्तविकता से पता चलता है कि सारे ग्रह में जल संसाधन समान रूप से वितरित नहीं हैं। इस बात का जिक्र करने की जरूरत नहीं कि कुछ मानवीय व्यवहार हैं जिन्‍होंने इस समस्या को जटिल और विकराल बनाया है, जैसे कि:

  • बिना जल संसाधन वाले निवास क्षेत्र। ऐसा इसलिए है क्योंकि वहाँ अन्य संसाधन हैं जो हमारे लिए अधिक मायने रखते हैं।
  • सबसे बड़े जल संसाधनों वाले कुछ क्षेत्रों को प्रदूषित कर रहे हैं।
  • जिन क्षेत्रों में पानी पर्याप्‍त मात्रा में हैं हम उन क्षेत्रों में घनी आबादी को बसाते हैं जब तक कि हम जल संसाधन की सीमाओं को पार नहीं कर जाते।
पानी-कमी-दूषित-नदी

दूषित नदियां

कुछ समाधान

दुनिया भर में पानी की कमी से बचाव के कई उपाय हैं। यहाँ कुछ उदाहरणों की एक सूची दी गई है:

  1. सामाजिक जागरूकता: हमें यह समझना चाहिए कि नल से निकलने वाला पानी, मानो जादू से आता है, वह सीमित है। पानी एक अधिकार है, लेकिन पानी का जिम्मेदारी से उपयोग भी एक जिम्मेदारी है।
  2. सार्वजनिक प्रशासन द्वारा पानी के बुनियादी ढांचे के रखरखाव और नवीकरण में निवेश करें। अधिकांश शहरों में उनके नेटवर्क का 20% से अधिक में पानी का रिसाव होता है। यह प्रतिशत अन्य शहरों में पानी के नुकसान के कारण 50% से अधिक तक बढ़ जाता है।
  3. बिना नमक वाले पानी का अधिक बेहतर उपयोग। हालांकि, हमें यह ध्यान में रखना होगा कि बिना नमक वाले पानी के लिए अधिक ऊर्जा खपत की जरूरत पड़ती है और इसका पर्यावरण पर भी प्रभाव पड़ता है।
  4. शुद्ध पानी से पुनर्चक्रण किए पानी के उपयोग का पता लगाएं। इनमें कृषि और उद्योग के लिए बहुत संभावनाएं हैं और शहरी और घरेलू उपयोग के लिए भी बढ़ रही है।

संक्षेप में, हमें एक वैश्विक मानसिकता की जरूरत है। हो सकता है कि भविष्य में जीवाश्म ईंधन की कमी की समस्या का समाधान हो जाए, लेकिन क्या तब तक हम अपने जल स्रोतों को नष्ट करते रहेंगे? क्‍या यह बहुत देर नहीं हो जाएगा?