हर साल, 3 मिलियन से अधिक लोग पानी की गुणवत्ता से संबंधित बीमारियों के कारण मर जाते हैं। इसका मतलब हुआ प्रत्‍येक 10 सेकंड में एक मौत। इनमें से ज्यादातर मौतें विकासशील देशों में होती हैं। हम न्‍यूनतम निवेश के साथ इन्‍हें आसानी से रोक सकते थे। 2.2 बिलियन से अधिक लोगों को सुरक्षित रूप से प्रबंधित पेयजल सेवाओं तक पहुंच नहीं है। इसके अतिरिक्‍त, 4.2 बिलियन लोगों के पास सुरक्षित स्वच्छता सेवाओं तक पहुंच भी नहीं है।

पानी पिएं और/या मरें

लाखों महिलाओं और बच्चों को किसी जल स्रोत तक पहुंचने के लिए एक दिन में 10 किलोमीटर से अधिक चलना पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनिया भर में बीमारी और मृत्यु के कारणों में से 85% दूषित पानी से आते हैं। सुरक्षित पानी तक पहुंच का अभाव भी इन मौतों का कारण बन रहा है। कई लोग खुद को जीवित रहने के लिए खराब गुणवत्ता वाले पानी पीने के धर्मसंकट में पाते हैं। लेकिन इस पानी के कारण उन्हें कुछ बीमारियाँ हो सकती हैं जो मौत का कारण बन सकती हैं। दूषित पानी के सेवन से कई विकार हो सकते हैं। इनमें से कुछ हैं दस्त, कुपोषण, आंत नेमाटोड संक्रमण या शिस्टोसोमियासिस।

पानी-गुणवत्ता-बीमारी-रोग

पीने के पानी और स्वच्छता सेवाओं तक पहुंच में सुधार से दुनिया भर में 9% बीमारियों को रोकने की क्षमता है। इसका मतलब हुआ कि विकासशील देशों के लाखों बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में क्रांतिकारी सुधार होगा। वे एक अनिश्चित जल प्रणाली के परिणामों से सबसे अधिक पीड़ित हैं।

दूषित पानी

WHO दूषित पानी को ऐसे पानी के रूप में परिभाषित करता है जिसकी “संरचना को संशोधित किया गया है ताकि यह अपनी प्राकृतिक अवस्था में इसके उपयोग के लिए शर्तों को पूरा न करे।” कीटाणु, भारी धातु या कुछ यौगिक पदार्थों की उपस्थिति पानी की गुणवत्ता को घटाती है। जल प्रदूषण का अर्थ है पानी के रूप में पहले से ही दुर्लभ संसाधन की मात्रा में भारी कमी।

पानी के खराब होने के मुख्य कारण हैं:

  1. अशोधित जल निकासी: लगभग 86% अपशिष्ट जल को बिना किसी ट्रीटमेंट के छोड़ दिया जाता है। यह आसपास की आबादी के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा जोखिम होता है।
  2. तापमान में बढ़ोत्तरी: उच्च तापमान पर, पानी में घुलित ऑक्सीजन को बनाए रखने की क्षमता कम होती है। इसके कारण बहुत से जीवों की मौत हो जाती है। साथ ही कुछ पदार्थों के स्‍वत: शुद्धता की क्षमता में भी कमी होती है।
  3. सिंचाई परिणाम: अधिकांश कृषि गतिविधियों में बड़ी मात्रा में कीटनाशकों, शाकनाशियों और उर्वरकों का उपयोग किया जाता है। पानी की गुणवत्ता पर इनका गहरा प्रभाव पड़ता है।
  4. वनों की कटाई: भारी संख्‍या में वनों की कमी के कारण मिट्टी का कटाव होता है। यह पानी में शामिल पदार्थों की मात्रा को बढ़ाता है।
  5. खनन: कुछ धातुओं के निकालने के लिए बहुत अधिक पानी का उपयोग करना पड़ता है। यदि इसका उपचार नहीं किया जाता है, तो यह पानी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर समस्या है।
  6. तेल का रिसाव: तेल निकालने की प्रथाओं में भारी मात्रा में पानी का दूषित होना शामिल है।

प्रकृति में कुछ पदार्थों को शुद्ध करने की एक निश्चित क्षमता होती है। इस क्षमता को पार करने से बचने के लिए, शुद्धिकरण स्टेशनों का उपयोग आवश्यक है। ये प्राकृतिक वातावरण में दूषित पानी के अनियंत्रित निकासी को रोकने में मदद करते हैं।

कई लोग खुद को जीवित रहने के लिए खराब गुणवत्ता वाले पानी पीने के धर्मसंकट में पाते हैं। लेकिन इससे उन्हें ऐसी बीमारियाँ हो सकती हैं जो मौत का कारण बन सकती हैं

Qatiumइंटेलीजेंट असिसटेंट
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तंजानिया शहर के पास एक गाँव में अपने सिर पर पानी के कंटेनर लेकर चलती अफ्रीकी महिलाएँ

सरल शब्‍दों में, एक नदी में कार्बनिक पदार्थों के निकास के निम्नलिखित प्रभाव होते हैं:

गिरावट क्षेत्र: यह छलकाव के ठीक बाद होता है। वहां घुलित ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से गिरनी शुरू हो जाती है। जीवन के सबसे नाजुक रूप गायब हो जाते हैं और माइक्रोबियल वनस्पति का क्षरण शुरू हो जाता है।

सक्रिय अपघटन क्षेत्र: ऑक्सीजन की सघनता इतनी कम हो जाती है कि अवायवीय अपघटन होने लगता है। इसके कारण गैसें और खराब बदबू निकलने लगते हैं।

रिकवरी क्षेत्र: ऑक्सीजन की सघनता ठीक होने लगती है। जीवन के अधिक जटिल रूप फिर से दिखने लगते हैं और पानी साफ होने लगता है।

स्वच्छ जल क्षेत्र: पानी के भौतिक-रासायनिक और जैविक विशेषताओं का स्वस्थ संतुलन।

जल ही जीवन है

हर रोज लाखों लोग दूषित पानी के साथ रहने के नकारात्मक प्रभावों से निपटते हैं। इसे रोकने के लिए, पीने के पानी और स्वच्छता की गुणवत्तापूर्ण सेवा तक पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है। जब आप इस लेख को पढ़ रहे थे, तो पानी की गुणवत्ता से संबंधित कारणों से 25 लोगों की मौत हो गई। यह समय अब कदम उठाने का है!